संख्या दिनांक अध्याय    
001 धुर की वाणी Play Download
006 02-10-1997 ध्यान Play Download
007 रावण Play Download
008 भक्ति Play Download
009 मन Play Download
010 ज्ञान Play Download
011 30-10-97 पूजा Play Download
012 06-11-97 शरण Play Download
013 30-10-97 उद्धर Play Download
014 16-11-97 काल पुरूष Play Download
015 20-11-97 धुर मस्तकि लिखिआ Play Download
016 27-11-97 पूरब लिखे का Play Download
017 04-12-97 फल मुक्ति Play Download
018 11-12-97 वृति Play Download
019 जीवत मरना खसम Play Download
020 18-12-97 भेख Play Download
021 सतपुरूष Play Download
022 25-12-97 साज नाद Play Download
023 अनहद नाद Play Download
024 08-01-98 निन्दा Play Download
025 15-01-98 नमाज Play Download
026 छष्ट चक्र Play Download
027 22-01-98 रोजा Play Download
028 29-01-98 गुरसिख Play Download
029 05-02-98 आलस Play Download
030 12-02-98 साकत Play Download
031 15-02-98 संत सिपाही Play Download
032 19-02-98 मनमुख Play Download
033 21-02-98 राम Play Download
034 26-02-98 जप Play Download
035 05-03-98 ख्याल Play Download
036 12-03-98 परमात्मा की आवाज Play Download
037 14-03-98 दुख और पाप Play Download
038 15-03-98 संत सतिगुरू Play Download
039 19-03-98 वेला Play Download

1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6

Powered by PARMATMA.



No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- जो हम को परमेसर उचर हैं - ते सभ नरक कुंड मह परिहैं ! ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- जो न भजंते नाराइणा - तिन का मै न करउ दरसना ! ----- काहे रे बन खोजन जाई -सरब निवासी सदा अलेपा तोही संग समाई । पुहप मध जिउ बास बसत है मुकर माह जैसे छाई - तैसे ही हरि बसे निरंतर घट ही खोजह भाई । ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- कहा भयो जो दोऊ लोचन मूंद कै बैठ रहिओ बक ध्यान लगायो । नात फिरयो लिये सात समुद्रन लोक गयो परलोक गवायो । ----- साच कहों सूं लाहो सभाय - जिन प्रेम कीओ तिन ही प्रभ पाइओ । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- अंत काल नाराइण सिमरै ऐसी चिंता मह जे मरै - बदत तिलोचन ते नर मुकता पीत्मबर वा के रिदै बसै । ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- प्राणी एको नाम धिआवहु - अपनी पत सेती घर जावहु । ----- कहत कबीर सुनहु रे प्रानी - छोडहु मन के भरमा । केवल नाम जपहु रे प्रानी - परहु एक की सरनां । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- हउमै नावै नाल विरोध है - दुई न वसह इक ठाई । ----- ब्रहमा बिसन महादेउ त्रै गुण रोगी विच हउमै कार कमाई । जिन कीए तिसह न चेतह बपुड़े हरि गुरमुख सोझी पाई । ----- हउमै रोग सभ जगत बिआपिआ तिन कउ जनम मरण दुख भारी । गुरप्रसादी को बिरला छूटै तिस जन कउ बलिहारी । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- हउमै दीरघ रोग है दारु भी इस माह । किरपा करे जे आपणी ता गुर का सबद कमाह । ----- कहा भूलिओ रे झूठे लोभ लाग - कछु बिगरिओ नाहिन अजहु जाग । ----- रैण गवाई सोइ कै दिवस गवाइआ खाइ । हीरे जैसा जनम है कउडी बदले जाइ । ----- रैन गई मत दिन भी जाइ - भवर गए बग बैठे आइ । ----- मै अंधुले की टेक तेरा नाम खुंदकारा । मै गरीब मै मसकीन तेरा नाम है अधारा । -----