संख्या दिनांक अध्याय    
140 02-12-99 ब्याह Play Download
141 19-12-99 समरथ गुरूएकता Play Download
142 06-01-00 ऐ मन मेरिआ Play Download
143 16-01-00 आत्मा की सिख-समरथ गुरू Play Download
144 03-02-00 सुरत शब्द योग Play Download
145 20-02-00 गुरू की बख्शीश-समरथ गुरू Play Download
146 02-03-00 सुरत शब्द योग– 2 Play Download
147 19-03-00 समरथ गुरूसरंक्षण Play Download
148 06-04-02 सुरत शब्द योग– 3 Play Download
149 16-04-00 समरथ गुरूगुरसिख प्रीत Play Download
150 04-05-00 हउ Play Download
151 21-05-00 समरथ गुरूसतिगुरू की सम्भाल Play Download
152 01-06-00 हउ– 2 Play Download
153 18-06-00 हरिजन प्रीतसमरथ गुरु Play Download
154 06-07-00 हउ– 3 Play Download
155 16-07-02 हरिजन प्रीत– 2 समरथ गुरु Play Download
156 हउ– 4 Play Download
157 18-08-00 रहमत का भण्डाराहउ– 5 Play Download
158 20-08-00 बिरथारहमत का भण्डारा– 2 Play Download
159 समरथ गुरू– 18 Play Download
160 समरथ गुरु– 19 Play Download
161 समरथ गुरु– 20 Play Download
162 चेतना समरथ गुरु– 21 Play Download
163 बन Play Download
164 12-10-03 तलाश Play Download
165 16-11-03 घट Play Download
166 वासना Play Download

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No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- जो हम को परमेसर उचर हैं - ते सभ नरक कुंड मह परिहैं ! ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- जो न भजंते नाराइणा - तिन का मै न करउ दरसना ! ----- काहे रे बन खोजन जाई -सरब निवासी सदा अलेपा तोही संग समाई । पुहप मध जिउ बास बसत है मुकर माह जैसे छाई - तैसे ही हरि बसे निरंतर घट ही खोजह भाई । ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- कहा भयो जो दोऊ लोचन मूंद कै बैठ रहिओ बक ध्यान लगायो । नात फिरयो लिये सात समुद्रन लोक गयो परलोक गवायो । ----- साच कहों सूं लाहो सभाय - जिन प्रेम कीओ तिन ही प्रभ पाइओ । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- अंत काल नाराइण सिमरै ऐसी चिंता मह जे मरै - बदत तिलोचन ते नर मुकता पीत्मबर वा के रिदै बसै । ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- प्राणी एको नाम धिआवहु - अपनी पत सेती घर जावहु । ----- कहत कबीर सुनहु रे प्रानी - छोडहु मन के भरमा । केवल नाम जपहु रे प्रानी - परहु एक की सरनां । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- हउमै नावै नाल विरोध है - दुई न वसह इक ठाई । ----- ब्रहमा बिसन महादेउ त्रै गुण रोगी विच हउमै कार कमाई । जिन कीए तिसह न चेतह बपुड़े हरि गुरमुख सोझी पाई । ----- हउमै रोग सभ जगत बिआपिआ तिन कउ जनम मरण दुख भारी । गुरप्रसादी को बिरला छूटै तिस जन कउ बलिहारी । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- हउमै दीरघ रोग है दारु भी इस माह । किरपा करे जे आपणी ता गुर का सबद कमाह । ----- कहा भूलिओ रे झूठे लोभ लाग - कछु बिगरिओ नाहिन अजहु जाग । ----- रैण गवाई सोइ कै दिवस गवाइआ खाइ । हीरे जैसा जनम है कउडी बदले जाइ । ----- रैन गई मत दिन भी जाइ - भवर गए बग बैठे आइ । ----- मै अंधुले की टेक तेरा नाम खुंदकारा । मै गरीब मै मसकीन तेरा नाम है अधारा । -----