संख्या अध्याय
अगरिम Simplications 2024-2025
1 आवश्यक तथ्य - 7 - ढोल की पोल
2 गुरबाणी सत्संग रूपी पोस्टर - संख्या - 17
3 विशेष रुकावट - 4 - बैराग
4 गुरबाणी सत्संग - 11 - पूजा
5 विशेष रुकावट - 5 - हरिमंदर
6 गुरबाणी सत्संग - 12 - शरण
7 गुरबाणी कीर्तन - जप मन सतनाम
8 गुरबाणी सत्संग रूपी पोस्टर संख्या - 18 = “गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसानै घाउ”
9 आवश्यक तथ्य- 8 - शिशु जीव सुरक्षा
10 गुरबाणी सत्संग - 13 - उद्धर
11 विशेष रुकावट - 6 - वैरागी
12 गुरबाणी सत्संग - 14 - काल पुरूष
13 शिशु जीव सुरक्षा भाग -2
14 गुरबाणी कीर्तन - 2 - इह जु दुनीआ सिहर मेला
15 गुरबाणी सत्संग रूपी पोस्टर - संख्या - 19 = “जिन कै अंतर वसिआ मेरा हरि हरि”
16 आवश्यक तथ्य - 9 - विशेष सावधानी
17 गुरबाणी सत्संग - 15 - धुर मस्तकि लिखिआ
18 विशेष रुकावट - 7 - बेपरवाह
19 गुरबाणी सत्संग - 66 - तीर्थ
20 गुरबाणी सत्संग - 61 - जड़ आराधना
21 गुरबाणी कीर्तन - 4 - जोगी
22 गुरबाणी सत्संग रूपी पोस्टर - संख्या - 20 = “इह धन अखुट न निखुटै न जाइ”
23 आवश्यक तथ्य - 10 - विशेष चेतावनी
24 गुरबाणी सत्संग - 16 - पूरब लिखे का लेखा
25 विशेष रुकावट - 8 - शौच
26 गुरबाणी सत्संग - 54 - शौच
27 विशेष रुकावट - 234 - ताती वाउ न लगयी
28 गुरबाणी कीर्तन - 5 - वापारी - सच वापार करहु
29 गुरबाणी सत्संग रूपी पोस्टर - संख्या - 21 = “काइआ हंस धुर मेल - करतै लिख पाइआ”
30 "चमत्कार" - Of फिक्का बोलना
31 गुरबाणी सत्संग - 17 - कर्म फल (फल मुक्ति)
32 आवश्यक तथ्य - 11 यन्त्र-मंत्र-तंत्र
33 "कल कलेश" - अब कलू आईइओ रे.....!
34 गुरबाणी सत्संग - 18 - वृति
35 गुरबाणी कीर्तन - 6 - पछतावा
36 “हरि की सेवा”
37 आवश्यक तथ्य - 12 - भीड का न्याय
38 "जीवत मरना खसम"
39 मन में - राम नामा जाप.....!
40 "भेख"
41 "माधो रे - तुम न तोरहु.....!"
42 "मोहन"
43 सब कुछ आपे आप हैं.....!
44 यन्त्र मर्यादा
45 "सतपुरूष"
46 'नाम' - ऐक संजीवनी बूटी.....!
47 "साज नाद"
48 गुरु तो केवल ऐक 'मति' हैं .....!
49 “हरि का मंदिर”
50 “निष्कपट”
51 “सब ऐक गोबिंद हैं.....!”
52 “भक्त की भक्ति”

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No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- जो हम को परमेसर उचर हैं - ते सभ नरक कुंड मह परिहैं ! ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- जो न भजंते नाराइणा - तिन का मै न करउ दरसना ! ----- काहे रे बन खोजन जाई -सरब निवासी सदा अलेपा तोही संग समाई । पुहप मध जिउ बास बसत है मुकर माह जैसे छाई - तैसे ही हरि बसे निरंतर घट ही खोजह भाई । ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- कहा भयो जो दोऊ लोचन मूंद कै बैठ रहिओ बक ध्यान लगायो । नात फिरयो लिये सात समुद्रन लोक गयो परलोक गवायो । ----- साच कहों सूं लाहो सभाय - जिन प्रेम कीओ तिन ही प्रभ पाइओ । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- अंत काल नाराइण सिमरै ऐसी चिंता मह जे मरै - बदत तिलोचन ते नर मुकता पीत्मबर वा के रिदै बसै । ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- प्राणी एको नाम धिआवहु - अपनी पत सेती घर जावहु । ----- कहत कबीर सुनहु रे प्रानी - छोडहु मन के भरमा । केवल नाम जपहु रे प्रानी - परहु एक की सरनां । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- No help is coming dear ! – so, you better start NOW – Help Yourself ? ----- हउमै नावै नाल विरोध है - दुई न वसह इक ठाई । ----- ब्रहमा बिसन महादेउ त्रै गुण रोगी विच हउमै कार कमाई । जिन कीए तिसह न चेतह बपुड़े हरि गुरमुख सोझी पाई । ----- हउमै रोग सभ जगत बिआपिआ तिन कउ जनम मरण दुख भारी । गुरप्रसादी को बिरला छूटै तिस जन कउ बलिहारी । ----- कोई भी मदद आने वाली नंही हैं प्यारे - बेहतरी इसी में हैं कि अपनी स्वंय की मदद करना शुरू करो ? ----- हउमै दीरघ रोग है दारु भी इस माह । किरपा करे जे आपणी ता गुर का सबद कमाह । ----- कहा भूलिओ रे झूठे लोभ लाग - कछु बिगरिओ नाहिन अजहु जाग । ----- रैण गवाई सोइ कै दिवस गवाइआ खाइ । हीरे जैसा जनम है कउडी बदले जाइ । ----- रैन गई मत दिन भी जाइ - भवर गए बग बैठे आइ । ----- मै अंधुले की टेक तेरा नाम खुंदकारा । मै गरीब मै मसकीन तेरा नाम है अधारा । -----